आर्थिक खुशहाली के दस चरण

अपनी वित्तीय स्थिति को अपने कंट्रोल में रखने के लिए कुछ आइडिया।

अहम जानकारी

  • बजट बनाएं और खर्चों को एडजस्ट करने के तरीकों की तलाश करें।
  • ऐसे संसाधनों के बारे में जानें जो संकट में आपकी मदद कर सकते हैं।
  • सबसे ज़्यादा ब्याज वाले कर्ज़ को पहले चुकाने के बारे में सोचें और जहां भी हो सके, कम ब्याज दरों वाले विकल्प देखें।
  • आपात स्थितियों और अचानक आने वाले खर्चों के लिए बचत करें (3 से 6 माह के खर्च)।
  • अपनी बचत और रिटायरमेंट की ज़रूरतों को समझें और उसी अनुसार निवेश करें।
  • एस्टेट प्लानिंग (परिसंपत्ति नियोजन), वसीयत और बीमा के ज़रिए खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।
  • नियमित रूप से (कम से कम साल में एक बार) अपनी वित्तीय स्थिति (फ़ाइनेंशियल वेलनेस) की पूरी समीक्षा करें।

 

चाहे आपकी उम्र कुछ भी हो, वित्तीय तंदुरुस्ती (फ़ाइनेंशियल वेलनेस) का मूल मंत्र यही है कि आप ज़्यादा से ज़्यादा पैसे बचाएं, कर्ज़ से दूर रहें या उसे कम से कम रखें, अचानक आने वाले खर्चों के लिए तैयार रहें और अपने आने वाले कल के लिए प्लानिंग करके चलें। यहां कुछ बातें बताई गई हैं, जिनकी मदद से आप इस साल अपने फ़ाइनेंस पर कंट्रोल पा सकते हैं। इस अभ्यास को नियमित रूप से दोहराने की योजना बनाएं – साल में कम से कम एक बार।
 

सब देखें सब बंद करें

बजट बनाना

बजट बनाने के नाम से डरने या घबराने की बिलकुल ज़रूरत नहीं है। आप बहुत ही सीधे और आसान तरीके से यह तय कर सकते हैं कि आपको कितने पैसे बचाने हैं और कितने खर्च करने हैं। नीचे दी गई बातों का ध्यान रखकर आप ज़रूरी खर्चों और शॉर्ट-टर्म बचत के बीच संतुलन बना सकते हैं, साथ ही यह भी पक्का कर सकते हैं कि आप अपनी रिटायरमेंट के लिए काफ़ी बचत कर रहे हैं।

1. यह देखें कि आप कितना कमा रहे हैं और कितना खर्च कर रहे हैं और एक बजट बनाएं। इसके बाद, आप यह तय कर सकते हैं कि कहां थोड़ा-बहुत समझौता करना है और अपने लक्ष्यों को पाने के लिए अपने बजट को कैसे सुधारना है। अपने ज़रूरी खर्च (आवास, किराने का सामान, इत्यादि), विवेकाधीन खर्च (रेस्टोरेंट, सब्सक्रिप्शन सेवाएं इत्यादि), कर्ज (क्रेडिट कार्ड बकाया, लोन इत्यादि) और बचत लक्ष्यों की सूची बनाएं।

2. कृपया 10+/<60/<30/10+ फ़्रेमवर्क पर कायम रहने पर विचार करें। सामान्य तौर पर, रिटायरमेंट के लिए अपनी टैक्स-पूर्व इनकम का कम से कम 10% बचाने पर विचार करें (जिसमें नियोक्ता का योगदान भी शामिल हो)। साथ ही, ज़रूरी खर्चों को अपनी हाथ में आने वाली इनकम के अधिकतम 60% तक सीमित रखें, विवेकाधीन खर्च (शौकिया खर्च) को अपनी हाथ में आने वाली इनकम के अधिकतम 30% तक सीमित रखें, और घर या कार की मरम्मत जैसे अप्रत्याशित खर्चों के लिए अल्पकालिक बचत को पूरा करने हेतु अपनी हाथ में आने वाली इनकम का कम से कम 10% बचाने का लक्ष्य रखें। यह अंदाज़ा लगाएं कि रिटायरमेंट के बाद आपको कितने पैसों की ज़रूरत होगी और फिर अपनी बची हुई इनकम में से कुछ हिस्सा उसी हिसाब से बचाकर रखें (अधिक जानकारी के लिए नीचे दिया गया “बचत” वाला सेक्शन देखें)।

3. संकट में काम आने वाले संसाधनों के बारे में जानें। प्राकृतिक आपदा, महामारी, आपातकालीन खर्च और नौकरी छूटने जैसी घटनाओं का आपकी वित्तीय स्थिति पर बहुत बड़ा और नुकसानदायक प्रभाव पड़ सकता है। वित्तीय दबावों और चिंताओं को कम करने के लिए बेरोजगारी सहायता, आपदा राहत कार्यक्रम और आपातकालीन अनुदान, सेवानिवृत्ति योजना ऋण / प्रतिकूल परिस्थितियों की निकासी और सरकारी प्रेरणा सहायता या प्रोत्साहन जैसे कार्यक्रमों से मदद मिल सकती है। मदद लें और पता करें कि आपके लिए कौन-सी सहायता उपलब्ध है।

कर्ज़ का प्रबंधन

कर्ज़ से बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसके फ़ायदे भी हैं; पिछले खर्चों पर ब्याज में जो पैसे आप दे रहे थे, उन्हें इसके बजाय आपके भविष्य के लिए बचाया जा सकता है। यहां कुछ बातें बताई गई हैं जो आपको प्राथमिकता तय करने और तेज़ी से कर्ज़ चुकाने में मदद करेंगी।

4. ऐसे विकल्प ढूंढें जहां ब्याज दरें कम हों। आप अक्सर कम ब्याज दरों वाले विकल्पों में अपने लोन को रीफ़ाइनेंस करा सकते हैं या अपने क्रेडिट कार्ड के बैलेंस को ट्रांसफ़र कर सकते हैं, कभी-कभी तो शुरुआती समय (प्रमोशनल पीरियड) के लिए 0% ब्याज भी होता है। खुद हिसाब लगाएं या मदद लें – अपने सभी कर्ज़ों, देय राशियों, मासिक भुगतानों और ब्याज दरों की एक सूची बनाएं। फिर आप अधिकतम बचत के लिए प्राथमिकता तय कर सकते हैं, सबसे अधिक राशि और सबसे अधिक ब्याज दर वाले कर्ज़ों से शुरू करते हुए।

5. क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन/मोबाइल लोन पर न्यूनतम से अधिक भुगतान करें। केवल न्यूनतम भुगतान करने से आप वर्षों तक कर्ज़ में रह सकते हैं, और कुछ मामलों में बैलेंस घटने के बजाय दरअसल बढ़ भी सकता है। क्रेडिट कार्ड का बिल जल्दी चुकाने के लिए एक्स्ट्रा पैसे बचाने की कोशिश करें। इसके लिए आप अपने शौक-मौज के खर्च कम कर सकते हैं, या मिलने वाले एक्स्ट्रा बोनस / वेकेशन अलाउंस वाले पैसों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

6. आपातकालीन स्थितियों और अचानक होने वाले खर्चों के लिए पैसे उपलब्ध रखें। एक आपातकालीन फ़ंड होने से आपको आगे और अधिक कर्ज़ के जाल में जाने से बचने में मदद मिल सकती है। बीमारी या घर की बड़ी मरम्मत जैसी कोई इमरजेंसी अपने आप में ही बुरी होती है, लेकिन आर्थिक रूप से तैयार न होने पर हालात और भी बिगड़ सकते हैं। कोशिश करें कि आपकी बचत में कम से कम इतना पैसा हो, जिससे आपके 3 से 6 महीने के ज़रूरी खर्च पूरे हो सकें। आपातकालीन फ़ंड में पैसा डालने को हर महीने के एक सामान्य बिल की तरह समझें और उसमें पैसे जमा करते रहें, जब तक कि वह पर्याप्त न हो जाए।

बचत

अपनी भविष्य की आकांक्षाओं और ज़रूरतों के बारे में सोचें; संभव है कि आपके पास बचत करने के लिए बहुत-से लक्ष्य हों। हो सकता है कि आप अपनी शादी, नया घर खरीदने, परिवार बढ़ाने, कहीं घूमने जाने, बच्चों की शादी की तैयारी करने, या फिर अपने रिटायरमेंट की प्लानिंग कर रहे हों या उसके बारे में सोच रहे हों। आप ज़िंदगी के किसी भी पड़ाव पर हों, यह जानना कि आपको कितनी बचत करने की ज़रूरत है और बचत के लक्ष्यों को पाने की दिशा में काम करना, आपको सही रास्ते पर बने रहने में मदद कर सकता है।

7. बचत करते समय अपनी जोखिम सहनशीलता और समय-सीमा पर विचार करें। अल्पकालिक बचत लक्ष्यों के लिए, जिनमें आपको कुछ महीनों में पैसे की आवश्यकता पड़ सकती है, जैसे कि आपातकालीन फ़ंड, आपके लिए कैश में बचत करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। दीर्घकालिक बचत के लिए अन्य प्रकार के खाते और निवेश साधन उपलब्ध हैं, हालांकि उनमें अधिक जोखिम हो सकता है। कहां बचत करनी है, यह तय करते समय आपको अपने बचत लक्ष्यों, समय सीमा और जोखिम सहनशीलता पर विचार करना चाहिए। फ़ैसले लेने में मदद के लिए प्रोफ़ेशनल इन्वेस्टमेंट/वित्तीय सलाह लेने पर विचार करें और समय-समय पर अपने इन्वेस्टमेंट रिव्यू करते रहें।

8. चाहे आप कितने भी जवान या बुज़ुर्ग क्यों न हों, अपने रिटायरमेंट के लिए निवेश करें। हमारा अनुमान है कि रिटायरमेंट के बाद सरकारी पेंशन या सामाजिक सुरक्षा लाभ (सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स) के अलावा भी आपको पैसों की ज़रूरत होगी। इसलिए, रिटायर होने से पहले आप जितना कमाते थे, उसका कम से कम 30% से 50% हिस्सा आपको अपनी खुद की बचत से पाने का टारगेट रखना चाहिए। टैक्स बचाने वाली सरकारी या नियोक्ता वाली योजनाओं का पूरा फ़ायदा उठाएं। खासकर ऐसी स्कीम, जहां आपके पैसे जमा करने के साथ-साथ आपकी कंपनी भी अपनी तरफ से पैसे जोड़ती है। समय रहते शुरुआत करना, लगातार बचत करना और समझदारी से निवेश करना महत्वपूर्ण है। लक्षित रिटायरमेंट आय को पूरा करने के लिए लोगों को अपनी टैक्स-पूर्व सैलरी का 10% से अधिक बचाने की ज़रूरत हो सकती है, इसलिए उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कदम उठाएं।

प्रोटेक्शन

बड़ी मेहनत से आपने इतना हासिल किया है, इसलिए इसे बचाकर रखना ज़रूरी है, जिसके लिए आप जीवन बीमा और एस्टेट प्लानिंग जैसे साधन इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि आप और आपके प्रियजन सुकून से अपना जीवन जियें।

9. एस्टेट प्लान और वसीयत तैयार करें। हालांकि अलग-अलग देशों में दस्तावेज़ और नाम अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन बुनियादी बातें एक जैसी ही हैं – इनका इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि आपने अपनी मृत्यु होने पर, आपके पास मौजूद धन-संपत्ति इत्यादि को, लिखित रूप में, किसी नामित व्यक्ति को देने की इच्छा व्यक्त की है, और आपके अक्षम होने की स्थिति में आपकी ओर से अन्य लोगों को चिकित्सा / वित्त सम्बन्धी फ़ैसले लेने का अधिकार दिया है। दस्तावेज़ सही होने से, ज़रूरत पड़ने पर, क़ानूनी / टैक्स संबंधी समस्याओं को हल करने में मदद मिल सकती है।

10. अपने लिए सही मात्रा में जीवन बीमा, गंभीर बीमारी बीमा और विकलांगता बीमा खरीदें। अचानक आपका निधन होने पर जीवन बीमा आपके परिवार को आय के नुकसान की भरपाई करने और अन्य वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यदि आप विकलांग हो जाते हैं, तो विकलांगता बीमा आपको आय के नुकसान की भरपाई करने में मदद करेगा। ये सभी आपको और आपके आश्रितों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

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